सावन का महीना हो या शिवरात्रि का त्यौहार एक अनोखा शिवलिंग जिनके चमत्कार को देख भक्त रह जाते हैरान। दर्शन करने मात्र से भक्तों की पूरी होती है मनोकामना

Achaleshwar Mahadev: दुनिया का एक अनोखा चमत्कारी शिव मंदिर, जहां दिन में तीन बार रंग बदलता है शिवलिंग, लगा रहता है भक्तों का मेला 


Achaleshwar Mahadev: दुनिया का एक अनोखा चमत्कारी शिव मंदिर, जहां दिन में तीन बार रंग बदलता है शिवलिंग, लगा रहता है भक्तों का मेला

देश में कई ऐसे चमत्कारिक मंदिर एवं धाम हैं जहां जाने मात्र से लोगों के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। भगवान शिव (Lord Shiva) का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। भोलेशंकर को देवों के देव महादेव भी कहते हैं। भगवान शिव के चमत्कारों का उल्लेख पौराणिक कथाओं में भी मिलता है। भगवानशिव के हजारों मंदिर हैं देश में जो चमत्कारों से भरे हुए हैं। जिनका आजतक रहस्य नहीं सुलझ पाया है।

आज हम ऐसे ही एक पावन धाम के बारे में बताने जा रहे है - अचलेश्वर महादेव मंदिर (Achaleshwar mahadev temple)। मध्य प्रदेश और राजस्थान की सीमा पर चंबल के बीहड़ों के लिए प्रसिद्ध इलाके में स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर को भगवान शंकर के अनूठे शिवलिंग के चलते काफी चर्चा मिल रही है।

मध्य प्रदेश की सीमा पर चम्बल नदी के बीहड़ों में स्थित प्राचीन मंदिर अचलेश्वर महादेव पर इन दिनों मंदिर पर विशेष चहल-पहल है। धोलपुर से पांच किलोमीटर दूर चम्बल नदी के किनारे बीहड़ो में स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर के बारे में कई किवदंतिया जुडी हुई हैं। राजस्थान के धौलपुर जिले की चंबल नदी के बीहड़ों में स्थित प्राचीन भगवान भोलेनाथ का अचलेश्वर महादेव मंदिर अगाध आस्था का केंद्र माना जाता है। कहा जाता है कि अचलेश्वर महादेव का शिवलिंग अद्भुत और चमत्कारिक है, यही वजह की यह स्थान श्रद्धालुओं को सबसे अधिक आकर्षित करता है।

Achaleshwar Mahadev: दुनिया का एक अनोखा चमत्कारी शिव मंदिर, जहां दिन में तीन बार रंग बदलता है शिवलिंग, लगा रहता है भक्तों का मेला

राजस्थान के धौलपुर स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर की महिमा दूसरे सभी शिव मंदिरों से बिल्कुल अलग है। कहा जाता है कि अचलेश्वर महादेव मंदिर को भगवान शंकर के अनूठे, अद्भुत और चमत्कारिक शिवलिंग के चलते काफी चर्चा मिल रही है, यही वजह की यह स्थान श्रद्धालुओं को सबसे अधिक आकर्षित करता है। मान्यता है कि यह देश का इकलौता शिवलिंग है, जो पूरे दिन में खुद से तीन बार रंग बदलता है। यह शिवलिंग देखने में बिल्‍कुल आम है, लेकिन इसके बदलते हुए खूबसूरत रंग सभी को हैरान कर देते हैं। 

सुबह के समय इसका रंग लाल होता है तो दोपहर में केसरिया हो जाता है, इसके बाद दिन ढलते-ढलते शिवलिंग का रंग सांवला और रात तक काला होता जाता है। सबसे बड़ी बात ये है कि इसका अंतिम छोर कहा है इसके बारे में आजतक कोई नहीं जान पाया। अब तक कोई भी इस रहस्य की वजह नहीं जान सका है, लेकिन आस्था है कि यह शिवजी की कृपा से ही संभव है।

इस शिवलिंग के रंग बदलने के पीछे की वजह क्या है? आज तक इसका जवाब नहीं मिल सका। कई बार यहां वैज्ञानिकों की रिसर्च टीमें भी आईं और जांच पड़ताल की लेकिन चमत्कारी शिवलिंग के रहस्य से पर्दा नहीं उठ सका।

पौराणिक मान्यता के अनुसार, लगभग एक हजार वर्ष पूर्व अद्भुत एवं चमत्कारी शिवलिंग का उद्गम हुआ था। श्रद्धालुओं के अनुसार लगभग हजार वर्ष पहले चंबल के बीहड़ों में कुछ चरावाहों को एक पत्थर की पिंडी दिखाई दी थी। जंगल में बसने वाले आसपास के ग्रामीणों ने जब शिवलिंग की खुदाई की तो इसका आदी अंत नहीं पाया गया। करीब 30 मीटर तक इसकी खुदाई तत्कालीन समय पर कराई गई थी लेकिन शिवलिंग का अंतिम छोर नहीं मिलने पर खुदाई को रोक दिया गया।

इसके बाद आसपास के लोगों में शिवलिंग को लेकर श्रद्धा उमड़ पड़ी। श्रद्धाओं ने जंगल में ही प्राण प्रतिष्ठा करके करीब 20 फीट ऊंचाई पर छोटे से परकोटे में मंदिर की स्थापना की गई। अचलेश्वर महादेव का शिवलिंग अद्भुत एवं चमत्कारी होने पर श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का केंद्र बन गया। लेकिन चंबल नदी के घनघोर बीहड़ में होने के कारण तत्कालीन समय में यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना कम रहता था।

अब से करीब 30 वर्ष पूर्व चंबल के डाकू पूजा अर्चना करने के लिए अचलेश्वर महादेव मंदिर पहुंचते थे। चंबल में बसने वाले डकैत अचलेश्वर महादेव मंदिर पर अनुष्ठान भी किया करते थे। लेकिन समय के साथ-साथ परिस्थितियां भी बदलीं और धीरे-धीरे मंदिर का विकास होने लगा। चंबल के बीहड़ों में डाकुओं के खत्म होने के साथ ही यहां आसपास के श्रद्धालुओं का आना-जाना शुरू हो गया और धीरे-धीरे मंदिर का विकास शुरू हुआ।

चंबल की घाटियों में ही यहां सड़क का निर्माण कराया गया है, जिससे श्रद्धालुओं के लिए आने-जाने का रास्ता सुगम हो गया है। मौजूदा वक्त में अचलेश्वर महादेव का ऐतिहासिक और चमत्कारी यह मंदिर जन-जन की आस्था का केंद्र बन चुका है। मंदिर पर हमेशा सहस्त्र धारा, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जप, रुद्री पाठ, रामचरितमानस पाठ के साथ श्रद्धालुओं द्वारा भंडारे और लंगर लगाए जाते हैं। यहां आने वाले भक्त और श्रद्धालुओं का ऐसा मानना है कि भगवान अचलेश्वर सभी श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि यहां जो भी व्यक्ति मन वचन और कर्म से भगवान अचलेश्वर के सामने पहुंचता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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इस अद्भुत अचलेश्वर महादेव मंदिर में लोगों की काफी श्रद्धा है। कहते हैं कि इस रहस्यमयी शिवलिंग के दर्शन करने मात्र से इंसान की सभी इच्छायें पूरी होती है और जीवन की सभी तरह की परेशानी और तकलीफें दूर हो जाती हैं। यहां आने वाले भक्त मनचाहे जावन साथी की कामना करते हैं। कहते हैं कि अगर कोई अविवाहित अपने प्रियतम की मन में मुराद लेकर इस शिवलिंग के दर्शन कर ले तो उनकी कामना पूर्ण हो जाती है।

अचलेश्वर महादेव मंदिर पर हर सोमवार और अमावस्या के दिन भारी तादाद में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। यहां सावन के महीने में भक्तों की बहुत भीड़ होती है और महाशिवरात्रि के अवसर पर विशाल लक्खी मेले का आयोजन किया जाता है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। चंबल के बीहड़ों में स्थित अचलेश्वर महादेव का मंदिर विशेष पहचान रखता है ।






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Sumegha Bhatnagar

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