जानिए क्या है भगवान शिव का प्रिय मंत्र?? महामृत्युंजय मंत्र - Maha Mrityunjaya Mantra in Hindi..Shravan Month 2024


महामृत्युंजय मंत्र - भगवान शिव का प्रिय मंत्र, Maha Mrityunjaya Mantra in Hindi




महामृत्युंजय मंत्र ऋग्वेद का एक श्लोक है| भगवान शिव को मृत्युंजय के रूप में समर्पित ये महान मंत्र ऋग्वेद में पाया जाता है| महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव का सबसे बड़ा और प्रिय मंत्र माना जाता है। सनातन धर्म में महामृत्युंजय मंत्र को प्राण रक्षक और महामोक्ष मंत्र कहा जाता है। पूराणों के अनुसार महामृत्युंजय मंत्र से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते है| वैसे तो महामृत्युंजय मंत्र का जाप कभी भी कर सकते है, परन्तु श्रावण मास में महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से सौ गुणा ज्यादा फल मिलता है।

हिन्दू धरम में सर्वोच्च माने जाने वाले देवों के देव महादेव भगवान शिव की आराधना करने से मनुष्य सभी सांसारिक सुखों को प्राप्त कर अंत में मोक्ष को प्राप्त होता है| महामृत्युंजय मंत्र (Maha Mrityunjaya Mantra in Hindi) भगवान शिव का सबसे बड़ा मंत्र माना जाता है| ऋग्वेद में इस मंत्र का उल्लेख मिलता है| शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि ऋषि मार्कंडेय की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव द्वारा यह मंत्र ऋषि मार्कंडेय को दिया गया था| मोक्ष की इच्छा रखने वाले जातक के लिए महामृत्युंजय मंत्र (Maha Mrityunjaya Mantra in hindi) सबसे उपयुक्त है| शिवजी का यह मंत्र मानव जीवन के लिए अभेद्य कवच है।



|| महा मृत्युंजय मंत्र ||




ॐ त्र्यम्बक यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धन्म।

उर्वारुकमिव बन्धनामृत्येर्मुक्षीय मामृतात् ।।


महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ

हम तीन नेत्र वाले भगवान शंकर की पूजा करते हैं जो प्रत्येक श्वास में जीवन शक्ति का संचार करते हैं, जो सम्पूर्ण जगत का पालन-पोषण अपनी शक्ति से कर रहे हैं, उनसे हमारी प्रार्थना है कि जिस प्रकार एक ककड़ी अपनी बेल में पक जाने के उपरांत उस बेल-रूपी संसार के बंधन से मुक्त हो जाती है, उसी प्रकार हम भी इस संसार-रूपी बेल में पक जाने के उपरांत जन्म-मृत्यु के बंधनों से सदा के लिए मुक्त हो जाएं तथा आपके चरणों की अमृतधारा का पान करते हुए शरीर को त्यागकर आप ही में लीन हो जाएं और मोक्ष प्राप्त कर लें।






महामृत्युंजय मंत्र का जाप एवं महत्व

महामृत्युंजय मंत्र ऋग्वेद का एक श्लोक है। महामृत्युंजय मंत्र शोक, मृत्यु भय, अनिश्चता, रोग, दोष का प्रभाव कम करने में, पापों का सर्वनाश करने में अत्यंत लाभकारी है। किसी को असाध्य रोग हो जाने पर अथवा जब किसी बड़ी बीमारी से उसके बचने की सम्भावना बहुत कम हो तो महामृत्युंजय मंत्र जाप लाभकारी होता है। कहा जाता है कि इस मंत्र का सवा लाख बार निरंतर जप करने से किसी भी बीमारी तथा अनिष्टकारी ग्रहों के दुष्प्रभाव को खत्म किया जा सकता है तथा अनिष्ट ग्रहों से शांति मिलती है। महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने  से अकाल मृत्यु का योग कट जाता है और लम्बी आयु मिलती है| इस मंत्र के जाप से आत्मा के कर्म शुद्ध हो जाते हैं और आयु और यश की प्राप्ति होती है। साथ ही यह मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभप्रद है। महामृत्युंजय मंत्र के जप से कुंडली के सबसे जटिल दोष कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है| इस जन्म के और पूर्वजन्म के सभी प्रकार के पापों का नाश होता है|


महा मृत्युंजय मंत्र का जप शिवालय में शिवलिंग के समक्ष बैठकर करना  चाहिए| सोमवार के दिन से इस मंत्र का जप शुरू किया जाना चाहिए| इसके अतिरिक्त सावन मास में किसी भी दिन या शिवरात्रि के दिन भी मंत्र जप शुरू करने के लिए अति शुभ होते है| शास्त्रों के अनुसार इस मंत्र के सवा लाख जप करने से भयंकर से भयंकर बीमारी या पीड़ा से छुटकारा मिलता है| किन्तु आप अपने सामर्थ्य अनुसार पहले दिन ही जप की संख्या का संकल्प लेकर शुरू करें| इसमें आप 11000, 21000 या आप अपने सामर्थ्य के अनुसार जप संख्या सुनिश्चित करें| वैसे तो महामृत्युंजय मंत्र का जाप कभी भी कर सकते है लेकिन ऐसी मान्यता है कि जप सुबह १२(12) बजे से पहले होना चाहिए, क्योंकि दोपहर १२(12) बजे के बाद इस मंत्र के जप का फल नहीं प्राप्त होता है|





महामृत्युंजय मंत्र का उच्चारण पूर्णरूप से शुद्ध होना चाहिए एवं मंत्र का उच्चारण होठों से बाहर नहीं आना चाहिए। महामृत्युंजय मंत्र का जाप रुद्राक्ष की माला से ही करना चाहिए साथ ही माला को गौमुखी में रखना चाहिए। जब तक जाप की संख्या पूर्ण न हो, माला को गौमुखी से बाहर नहीं निकालना चाहिए। महामृत्युंजय मंत्र का जाप पूर्व दिशा की तरफ मुख करके तथा कुशा के आसन के ऊपर बैठकर करना चाहिए। इस मंत्र को करते समय धूप-दीप जलते रहना चाहिए एवं जाप करते समय दूध मिले जल से शिवलिंग का अभिषेक करते रहना चाहिए। इन महत्वपूर्ण बातों का विशेष ध्यान, जाप करते समय रखना चाहिए।


कुछ लोगों में ऐसी अवधारणा बनी हुई है कि महा मृत्युंजय मंत्र का जाप केवल विशेष परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए| किन्तु ऐसा नहीं है महा मृत्युंजय मंत्र का जाप करना पूरी तरह से सुरक्षित है और किसी भी व्यक्ति द्वारा इस मंत्र का जाप किया जा सकता है| अगर आप नही कर पा रहे हैं तब इस मंत्र का जाप किसी विद्वान पंडित से करवायें, यह आपके लिए और अधिक लाभकारी होगा। महामृत्युंजय मंत्र जाप के बाद 21 बार गायत्री मन्त्र का जाप करना चाहिए जिससे महामृत्युंजय मन्त्र का अशुद्ध उच्चारण होने पर भी पर अनिष्ट होने का भय नही रहता है। महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना सदैव मंगलकारी होता है।




































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    Sumegha Bhatnagar

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