August 2020
पितृ पक्ष (Pitru Paksha 2020) को हिंदू धर्म में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. इस साल पितृ पक्ष 1 सितंबर से शुरु होने जा रहा है जो 17 सितंबर तक रहेगा. इस साल नवरात्र और पितृ पक्ष में अधिकामास पड़ रहा है जिसके चलते दोनों में एक महीने का अंतर आ गया है. जिसके चलते इस साल पितृ पक्ष पर एक खास संयोग बन रहा है जो 19 साल बाद आया है. माना जाता है कि जो लोग पितृ पक्ष में पूर्वजों का तर्पण नहीं कराते, उन्हें पितृदोष लगता है. श्राद्ध के बाद ही पितृदोष से मुक्ति मिलती है. श्राद्ध से पितरों को शांति मिलती हैं. वे प्रसन्‍न रहते हैं और उनका आशीर्वाद परिवार को प्राप्‍त होता है
Pitru Paksha 2020

1 सितंबर : पूर्णिमा, 9.45 के बाद 
2 सितंबर : प्रतिपदा श्राद्ध, सुबह 11 बजे के बाद 
3 सितंबर : प्रतिपदा श्राद्ध, पूरा दिन 
4 सितंबर : दूसरा श्राद्ध, पूरा दिन 
5 सितंबर : तीसरा श्राद्ध, पूरा दिन 
6 सितंबर : चौथा श्राद्ध, पूरा दिन 
7 सितंबर : पांचवां श्राद्ध, पूरा दिन 
8 सितंबर : छठा श्राद्ध, पूरा दिन 
9 सितंबर : सातवां श्राद्ध, पूरा दिन 
10 सितंबर : आठवां श्राद्ध, पूरा दिन 
11 सितंबर : नौवां श्राद्ध, पूरा दिन 
12 सितंबर : दसवां श्राद्ध, पूरा दिन 
13 सितंबर : ग्यारहवां श्राद्ध, पूरा दिन 
14 सितंबर : बारहवां श्राद्ध, पूरा दिन 
15 सितंबर : तेरहवां श्राद्ध, पूरा दिन 
16 सितंबर : चौदहवां श्राद्ध, पूरा दिन 
17 सितंबर : अमावस्या, पूरा दिन

1. काला तिल
काला तिल का दान श्राद्ध में करें ऐसी मान्यता है की ऐसा करने से पितरों के तर्पण के निमित्त किसी भी चीज का दान करते समय काले तिल को लेकर दान करें. ये कहा जाता है की अगर इस दौरान अन्य वस्तुओं का दन न भी कर पाएं तो काले दिल का दान अवश्य करें. दान की दृष्टि से काले तिलों का दान संकट, विपदाओं से रक्षा करता है.

2. चांदी
चांदी धातु से मिर्मित किसी भी वस्तु का देन अवश्य करना चाहिए, ऐसा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और साथ ही आर्शर्वाद प्राप्त होता है. चांदी देने से संबंध चंद्र ग्रह से है इसलिए श्राद्ध में चांदी,चावल,दूध से पितर को खुश करें

3.वस्त्र
श्राद्ध कर्म में वस्त्रों का दान करना चाहिए, मान्यताएं हैं कि जो व्यक्ति श्राद्ध करता है तो ऐसे में धोती,दुपट्टे का देन करें. ऐसे में वो वंशजों से वस्त्र की भी कामना आदि करते हैं.

4. गुड़ औऱ नमक
श्राद्ध के समय गुड़ और नमक का दान जरुर करें इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और आपको उनका आर्शीर्वाद से आपके घर में सुख-शांति का वातावरण बना रहता है. ऐसा करने से गृह-क्लेश भी दूर है, ऐसे में श्राद्ध में इन चीजों का दान करें.

5. जूते-चप्पल का दान
पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए आप जूते चप्पलों का दन करें, ऐसा कपने से आपके पूर्वज खुश होते हैं. मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से घर में सुख-शांति और खुशहाली आती है और पितरों की आत्मा को शांति मिलती है.

करें गणेश चतुर्थी पर यह उपाय



गणेश चतुर्थी या संकष्टी चतुर्थी हिंदू धर्म का एक प्रसिद्ध त्यौहार है। हिंदू मान्यता के अनुसार किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। घर में कोई भी बड़ा त्यौहार हो या कुछ ख़ास सबसे पहले गणेश पूजन होता है। भारत में हर साल आने वाला श्री गणेश उत्सव इस बार 22 अगस्त 2020 से शुरू हो रहा है। 


हिन्दू धर्म में गणेश चतुर्थी का बहुत अधिक महत्व माना जाता है। हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार, भादो माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान श्री गणेश का जन्म हुआ था। ऐसी मान्यता है कि यदि इस दिन पूर्ण श्रद्धा के साथ भगवान गणेश की पूजा अर्चना की जाए और इसके साथ कुछ उपाय भी किये जायें तो विघ्नहर्ता श्रीगणेश जी अति शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं।




आज हम लेकर आए हैं समस्त पूजा विधि के साथ एक पौराणिक प्रयोग जिसे करने से आपके सारे काम सफल हो सकते हैं। इसके लिए आपको एक धागा, डोरी या मौली की आवश्यकता है और उपाय के लिए इसका ही प्रयोग करना है। आइए जानते हैं इसका पूरा प्रयोग…


* आपको सबसे पहले गणेश चतुर्थी के दिन ब्रह्म मूहर्त में उठकर स्नान करना है और शुद्ध कपड़े पहन लेना है। अगर हो सके तो लाल रंग के वस्त्र पहन ले क्योंकि लाल रंग के वस्त्र पहनना अति शुभ होता है।


* अब आप गणपति का पूजन करने के लिए शुद्ध आसन पर बैठ जायें। अपना मुख पूर्व अथवा उत्तर दिशा की तरफ करके बैठे।


* अब इसके बाद पंचामृत से श्री गणेश को स्नान करायें। अब इसके बाद आप गणेश जी को केसरिया चंदन, अक्षत, दूर्वा अर्पित कर कपूर जलाकर उनकी पूजा करें। उनको मोदक यी लड्डू अर्पित करें और आप उन्हें लाल रंग के पुष्प चढ़ाये जो उन्हें बहुत अच्छे लगते हैं। आप गणेश जी की पूजा करते समय गुड़हल के फूल का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसा बताया गया हैै कि गुड़हल के फूल से गणेश जी बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्त पर अपनी कृपा बरसाते हैं। इसके बाद उनकी आरती कर उन्हें प्रसन्न कर दे।


इसी के बाद आप श्री गणेश जी का श्री स्वरूप ईशाण कोण में स्थापित करें और उनका श्री मुख पश्चिम की ओर रहे इस बात का ध्यान रखे। अब आप एक सूत का कच्चा धागा लें। आप उस धागे पर 7 गांठ लगा दे और उसे बप्पा के चरणों में रख दें। इसके बाद यह ध्यान रखे कि विसर्जन से पूर्व उस धागे को आपने अपने पर्स में रखना है। ऐसा उपाय करने से धन-दौलत, सुख-समृद्धि, सफलता, सौभाग्य, ऐश्वर्य और यश-कीर्ति हर समय आपके साथ बनी रहेगी।


नोट- अगर आपके पास गणेश जी की मूर्ति नहीं है तो पूजा स्थान पर एक सुपारी रख दें और पूजा करें।


इसके अलावा यह भी ध्यान रखें कि गणेश जी की पूजा में तुलसी के पत्ते का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।












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