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नवरात्रि स्पेशल: साबूदाना रबड़ी



दोस्तों, नवरात्रि शुरू हो गई है। हम में से बहुत से ऐसे लोग हैं जो इस दौरान 9 दिन तक व्रत रखते हैं। आप सभी ने दूध और फलूदा रबड़ी का स्वाद तो कई बार लिया होगा। लेकिन क्या आपने कभी साबूदाने से बनी रबड़ी खायी,अगर नहीं खायी है तो आज हम आपको साबूदाना रबड़ी बनाने की रेसिपी के बारे बताने जा रहे है। ये खाने में बहुत ही स्वादिष्ट होता है और इसे बनाना भी बहुत आसान है। इसे व्रत के अलावा भी बनाकर खा सकते है



रेसिपी क्विज़ीन : इंडियन, डिजर्ट

कितने लोगों के लिए : 2 - 4

समय : 15 से 30 मिनट

कैलोरी : 600-700

मील टाइप : वेज


आवश्यक सामग्री:


एक कप साबूदाना

आधा लीटर दूध

एक बड़ा चम्मच चीनी

एक केला

आधा सेब

एक कप क्रीम

2-3 चेरी

एक बड़ा चम्मच अनार


सजावट के लिए


गुलाब की पंखुड़ियां

केसर धागे

एक बड़ा चम्मच बादाम की कतरन


विधि:


* सबसे पहले साबूदाने को पानी में भिगोकर 4-5 घंटे के लिए रखें


* मीडियम आंच में एक पैन में दूध डालकर उबालें


* दूध में उबाल आने पर साबूदाना छान लें और इसमें थोड़ा-थोड़ा डालते जाएं और कड़छी से लगातार चलाते जाएं


* दूध गाढ़ा होने लगे तब इसमें चीनी डालकर मिक्स करें और आंच बंद कर ठंडा होने रख दें


* अब इसमें कटे हुए सेब, केले और क्रीम को फेंटकर मिलाएं. फ्रिज में ठंडा होने के लिए रख दें


* रबड़ी को गिलास में निकालें और अनार दाने, चेरी, गुलाब की पंखुड़ियों व केसर धागे से गार्निश कर सर्व करें








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नवरात्रि में 9 देवियों को पूजा में चढ़ाएं ये फूल, मां होंगी प्रसन्न




शारदीय नवरात्रि शुरु होने में अब कुछ ही समय बाकी है। हिन्दू धर्म में नवरात्रि का बहुत महत्व है। इस अवसर पर 9 दिन तक मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है। इन नौ दिनों में मां की पूजा बहुत धूम धाम से की जाती है।


नवरात्रि की पूजा-पाठ में फूल बहुत महत्व रखते हैं। पूजा करते समय देवी मां को अर्पित करने के लिये फूलों की आवश्यकता होती है। ऐसे में नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते समय कुछ खास तरह के फूल उनके चरणों में अर्पित किये जाते हैं। इन फूलों को चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है।


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनायें पूरी करती हैं। आज हम इस लेख में आपको यह बताने जा रहे हैं कि मां दुर्गा को प्रसन्न करने हेतु उनके 9 स्वरूपों पर कौन-कौन से फूल अर्पित करने चाहिए। तो आइये जानते हैं कि 9 देवियों को कौन-कौन से फूल प्रिय हैं....


प्रथम, मां शैलपुत्री :


नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। उनको प्रसन्‍न करने के लिए आप सफेद कनेर के पुष्‍प का प्रयोग कर सकते हैं। पूजा में सफेद कनेर के फूलों की माला पहनाकर माता को पहनाएं।


द्वितीय, मां ब्रह्मचारिणी :


नवरात्र का दूसरा दिन मां ब्रह्माचारिणी को समर्पित है। मां की पूजा के बाद उन्हें वटवृक्ष के पत्‍ते और वटवृक्ष के पुष्‍पों की माला अर्पित करनी चाहिए। इससे बुद्धि और ज्ञान में इजाफा होता है। साथ ही व्‍यापार में भी सफलता हासिल होती है।


तृतीय, मां चंद्रघंटा :


तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। पूजा के बाद शंखपुष्‍पी के पुष्‍प चढ़ाने के बाद पराक्रम में वृद्धि होती है। घर में खुशहाली आती है और सुख समृद्धि आती है।


चतुर्थी, मां कुष्‍मांडा :


नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्‍मांडा की पूजा की जाती है। विधिवत पूजा-अर्चना के बाद पीले रंग के पुष्‍प चढ़ाने से मां प्रसन्‍न होती हैं। अच्‍छे स्‍वास्‍थ्‍य की प्राप्ति होती है।


पंचमी, मां स्‍कंदमाता :


नवरात्र का पांचवा दिन मां स्‍कंदमाता को समर्पित है। मां स्‍कंदमाता को नीले रंग के पुष्‍प चढ़ाए जाते हैं। इससे संतान प्राप्ति होती है।





छठवीं, मां कात्‍यायनी :


नवरात्र में छठवें दिन कात्‍यायनी देवी की पूजा की जाती है। पूजन के बाद बेर के पेड़ के पुष्‍प चढ़ाने से मां की कृपा प्राप्‍त होती है। शत्रुओं पर विजय प्राप्‍त होती है।


सप्तमी, मां कालरात्रि :


नवरात्र का सातवां दिन मां कालरात्रि को समर्पित है। इन्हें गुंजामाला अर्पित करनी चाहिए। इससे मां प्रसन्न होती हैं।



अष्‍टमी, मां महागौरी :


नवरात्र में आठवें दिन मां गौरी की पूजा की जाती है। सामान्‍य पूजा के बाद मां को कलावा की माला चढ़ाएं। ऐसा करने से मां की पूरी कृपा भक्‍तों को प्राप्‍त होती है।



नवमी, मां सिद्धिदात्री:


नवरात्र का नौवां दिन मां सिद्धिदात्री को समर्पित है। इनकी पूजा करने के बाद इन्हें गुड़हल के पुष्‍प चढ़ाए जाते हैं। इससे मां की कृपा भक्तों पर बनी रहती है।









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नवरात्रि के 9 दिनों के अनुसार 9 रंग के कपड़े पहन कर, करें माँ की आराधना



नवरात्रि, देवी दुर्गा को समर्पित नौ दिवसीय हिंदू त्यौहार है और उनके नौ अलग-अलग रूपों का यह त्यौहार कल से शुरू होने वाला है। हिंदू परंपरा के अनुसार इस साल नवरात्रि का त्यौहार 17 अक्टूबर 2020 से शुरू होगा और 25 अक्टूबर 2020 तक रहेगा। 26 अक्टूबर 2020 को लोग दशहरा मनाएंगे, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होता है। इस दिन को यादगार तरीके से मनाने के लिए देश भर के सभी हिंदू इस त्यौहार को अनुष्ठान के रूप में मनाते हैं।


हिन्दू धर्म में नवरात्रि के इन 9 दिनों का बहुत अधिक महत्व होता है। नवरात्रि के इन नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग अलग स्वरूपों की आराधना की जाती है। इसके साथ ही कुछ लोग पहला और आखिरी तो कुछ नौ दिनों का उपवास कर मां से सुख समृद्धि की कामना करते हैं। नवरात्रि के इन नौ दिनों में ना केवल मां का श्रृंगार खास तरह से किया जाता है बल्कि अगर कोई जातक देवी मां की पूजा के दिन के अनुरूप वस्त्र पहने तो वो भी फलदायी होता है।


ऐसे में नौ दिनों तक चलने वाली पूजा के दौरान अगर आप भी मां को करना चाहते हैं खुश, तो जानें हर दिन पहने किस रंग के कपड़े ताकि मां की कृपा आप पर बनी रहे।


1. मां शैलपुत्री




नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है। इस दिन कलश की स्थापना की जाती है और पूजन किया जाता है। अगर इस दिन पूजा करने वाला उपासक लाल, गुलाबी या फिर गहरे गुलाबी रंग का कपड़ा पहनकर पूजा करेगा तो वो शुभ फलदायी होता है।




2. देवी ब्रह्मचारिणी



नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के स्वरूप देवी ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है। इस दिन सफेद, क्रीम या फिर पीले रंग के वस्त्र पहकर पूजा करना फलदायी होता है। इसके साथ ही सभी मनोरथ पूरे भी होते हैं।



3. मां चंद्रघंटा



नवरात्रि के तीसरे दिन मां च्रंद्रघंटा की उपासना की जाती है। मां चंद्रघंटा बाघ पर सवार दुर्गा जी का ही तीसरा स्वरूप हैं। इस दिन पीला, लाल, दूधिया फिर केसरिया रंग का वस्त्र पहनना चाहिए। कहा जाता है ऐसा करने पर मां प्रसन्न हो जाती हैं और चिरायु, आरोग्य और सुखी होने का आशीर्वाद देती हैं।



4. देवी कुष्मांडा




नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की आराधना की जाती है। मां कूष्मांडा को प्रकृति की देवी कहा जाता है। इसीलिए इस दिन क्रीम, पीला, हरा और भूरे रंग का वस्त्र पहनकर पूजा करना फलदायी होता है।



5. स्कंदमाता



नवरात्रि के पांचवें दिन देवी स्कंदमाता की आराधना की जाती है। स्कंदमाता की पूजा अर्चना सफेद, दूधिया, लाल या फिर हरे रंग के वस्त्र पहनकर करना शुभ फलदायी होता है। मां प्रसन्न होकर आरोग्य और ज्ञान की प्राप्ति का आशीर्वाद देती हैं।



6. मां कात्यायनी



नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना होती है। दुर्गा मां के इस स्वरूप को महिषासुर मर्दिनी भी कहा जाता है। इस दिन नारंगी, लाल, मेरून, गेरुआ या फिर मूंगा रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना चाहिए।



7. कालरात्रि



नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा अर्चना की जाती है। इनकी पूजा में बैंगनी, ग्रे, नीला और आसमानी रंग शुभ माना जाता है। मां प्रसन्न होकर भक्तों को क्लेशों से दूर रहने का आशीर्वाद देती हैं।



8. महागौरी



नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा के स्वरूप महागौरी की अर्चना की जाती है। महागौरी को सुख शांति की देवी कहा जाता है। इनकी पूजा में केसरिया, नारंगी, गुलाबी या फिर लाल रंग का वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।



9. मां सिद्धिदात्री



नवरात्रि के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है। इस दिन विधि विधान से पूजा करने वालों को लाल, गुलाबी, क्रीम, नारंगी वस्त्र पहनकर पूजा करना शुभ माना जाता है।



साथियों, आप भी चाहें तो माता रानी की पूजा करते समय 9 दिनों के अनुरूप कपड़े पहन कर उनकी पूजा करें और मां का आशीर्वाद प्राप्त करें।

         

         🌹🌹जय माता रानी🌹🌹










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क्या है देवी माँ के 9 वाहनों का अर्थ



हिन्दू धर्म में माता दुर्गा अथवा पार्वती के नौ रूपों को नवदुर्गा कहा जाता है। मां दुर्गा के इन नौं रुपों को पापों का विनाश करने वाली कहा जाता है। पुराणों के अनुसार सभी हिंदू देवी-देवताओं के वाहन अलग अलग है। वास्तव में ये सभी कल्पना न होकर संबंधित देवी-देवता की शक्ति का परिचय देते हैं।


धार्मिक पुराणों के अनुसार, प्रत्येक देवी के अलग अलग वाहन, अस्त्र शस्त्र हैं लेकिन यह सब एक हैं। ऎसा नहीं है कि मां दुर्गा सिंह की ही सवारी करती है, बल्कि इसका अर्थ यह है कि जो लोग मां की सच्चे मन से पूजा-अर्चना करते हैं, वह वास्तव में सिंह के समान ही शक्तिशाली होते हैं और किसी भी तरह के संकट का सामना बड़ी ही सहजता से कर सकते हैं। इसी तरह प्रत्येक देवी के वाहनों का भी विशेष अर्थ है जो निम्न प्रकार से हैं:--



1. सिंह - 


देवी दुर्गा का वाहन सिंह बल का प्रतीक है माता दुर्गा के उपासक शक्तिशाली होते है और शत्रुओ का सामना करने में समर्थ होते है। 



2. हंस -

देवी सरस्वती का वाहन हंस है मोती युगना उसकी विशेषता है इन गुणों को अपनाकर ब्रह्म पद पाया जाता है। 



3. व्याघ्र -


यह स्फूर्ति व निरंतर कर्म करने का प्रतीक है अतः माता देवी कुछ विशिष्ट रूपों में बाघ की सवारी करती है। 



4. वर्षभ -

 

बैल ब्रह्मचर्य व संयम का प्रतीक है यह बल व सकारात्म ऊर्जा की प्राप्ति करता है इसलिए न केवल भगवती शैलपुत्री अपितु भगवान शिव नंदी की ही सवारी करते है। 



5. गरुड़ -


भगवती लक्ष्मी जब भगवान नारायण के साथ विचरण करती है तो वे विष्णु वाहन गरुड़ पर विराजमान होती है गरुड़ त्याग व वैराग्य के प्रतीक है इन्हें पक्षीयो का राजा माना जाता है। 


6. मयूर -


भगवान कार्तिकेय की  परम शक्ति कार्तिकेय मोर पर विराजित है मोर सौन्दर्य, लावण्य, स्नेह, व योग शक्ति का प्रतीक है। 



7. उल्लू -


माता लक्ष्मी का वाहन उल्लू आध्यात्मिक दृष्टि से अंधता का प्रतीक है सांसारिक जीवन में लक्ष्मी यानि धन दौलत के पीछे भागने वाला इंसान आत्मज्ञान रूपी सूर्य को नहीं देख पाता है। 



8. गदर्भ -


यह तमोगुण का प्रतीक है इसलिए भगवती कालरात्रि ने इसे अपने वाहन के रूप में चुना है माता शीतला का वाहन भी गधा ही होता है। 




9. हाथी-


देवी विभिन्न रूपों में हाथी पर विराजमान होती है अनेक लोकदेवीया हाथी पर बैठती है तंत्र शास्त्र के अनुसार देवी का एक नाम गजलक्ष्मी भी है। 


🌹🌹।। जय माता दी ।। 🌹🌹










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