June 2019
Nowadays, blogging is the best ways of earning online. It is one of the best career opportunity. Most of the bloggers find difficulty to blog daily. On the contrary, some bloggers find it very easy to blog daily.




Sometimes there are some problems that can arise when we are trying to become a successful blogger. Right now you cannot figure out what you want to write about your blog. Blogging needs lots of hard work, research, long working hours and most important patience. But every time one question arise on my mind that can everybody get success in blogging or not?


As you are aware, for your blogging to be effective, you will need to add fresh content to your blog on a regular basis. This article presents a step-by-step guide to follow 10tips that you can use to make event blogging easy.  In that case, you have come to the right place. Yes, I am here to help guide you through this.

1. You can write your blog content in advance and save it to ensure that it is prepared to be posted daily. If you have time to write, make an effort to write enough blog content that will be sufficient for a few days or for the entire week. You are able to write and keep your blog posts on your blog and all you need to do is to post the posts daily. This implies on those days when you are unable to write anything, you can still post fresh content on your blog utilizing the blog posts you would have saved.


2.  Make a posting schedule and then stick to it. Having a blogging plan really makes it simpler for you to blog. It actually provides soft deadlines that keep you motivated to sit down and write a good post. You won’t be able to put off your blogging if your readers expect a new post on every day or every Monday and you know it.


3. Prepare a running list of your blogging ideas. You can use a program just like Evernote, to keep track of your thoughts and the different resources you can draw when you are writing your posts.

4. Forget being original totally. Each idea is inspired by someone else idea. So if you take any person idea then give the credit to that person. It's better to write your own ideas on that particular subject. So that you don't face any kind of problem.


5. Write a short & good blog. There is no need to write lengthy blogs. There are some bloggers who say that no post should be under 1500-2000 words. All the posts should take days to write and be the absolute authority on whatever you are writing about. Rubbish, I totally disagree with this. Write as much as you need to. If you can cover your topic around in 700- 800 words, Do it.  But if your topic takes 1500-2000 words, then be sure you are holding your reader's attention for the entire post.


जानिए क्यों है तुलसी का पौधा स्वास्थ्य के लिए लाभकारी?



यह तो सभी जानते हैं कि हमारे जीवन में पौधों का कितना महत्व है। हमारे जीवन में स्वच्छ वायु प्रदान करने के साथ-साथ ये पौधे ही हैं जो हमें अनेक रूपों में लाभ पहुंचाते हैं। इन्हीं पौधों में से तुलसी एक ऐसा पौधा है कि जिसका हिंदू धर्म में बहुत महत्व है।

हिंदू धर्म में तुलसी का बहुत अधिक धार्मिक महत्व है। अधिकतर हिंदू परिवारों में तुलसी का पौधा होता है और साथ ही इसे सुख और कल्याण के प्रतीक के रूप में मानते हैं। साथ ही हिंदू परिवारों में तुलसी की पूजा भी की जाती है। जहां धर्म में तुलसी का इतना अधिक महत्व है वहीं औषधि के रूप में भी तुलसी का प्रयोग किया जाता है।

जितना पावन तुलसी का नाम माना जाता है उतना ही इस पौधे का प्रभाव भी पवित्र है। तुलसी और उसके कई औषधीय गुण आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सा में तुलसी की जड़, उसकी शाखाएं, पत्ती और बीज सभी को स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बताया गया है। इसका उपयोग विभिन्न तरह के रोगों  के निवारण के लिए किया जाता है। सर्दी-खांसी के अलावा कई अन्य बीमारियों में भी तुलसी एक प्रभावशाली औषधि है।



जानिए क्यों है तुलसी का पौधा स्वास्थ्य के लिए लाभकारी?


इस बहुमूल्य पौधे के कुल 5 प्रकार होतेे हैं, जो स्वास्थ्य के साथ ही वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह हैं तुलसी के 5 प्रकार -

1) श्याम/कृष्ण तुलसी,

2) राम तुलसी,

3) श्वेत/विष्णु तुलसी,

4) वन तुलसी,

5) नींबू तुलसी 


यूं ही नहीं है हमारे भारतीय घरों में तुलसी को इतना सम्मान दिया जाता है। आपने देखा होगा कि ज्यादातर लोग अपने घर में दो तरह के तुलसी लगाते हैं, एक राम तुलसी जिसकी पत्तियों का रंग हल्का हरा होता है और दूसरी श्याम/कृष्ण तुलसी जिसकी पत्त‍ियों का रंग थोड़ा गहरा होता है।

तुलसी जहां शरीर को शुद्ध करती है वहीँ वातावरण को भी स्वच्छ बनाते हुए, पर्यावरण को भी संतुलित बनाये रखने में मदद करती है। आइये आज यहां हम आपको तुलसी के पौधे से होने वाले फायदों के बारे में बता रहे हैं जिन्हें जानने के बाद आप भी बीमारियों में तुलसी का उपयोग ज़रूर करेगें।



Seeing to the watermelon, coolness begins to feel. As much as it is captivating to look, it equally gives relish in eating. It’s damp down the thirst by giving coolness in the summer season. Plenty of water in watermelon and its sweetness fills the body with energy. Its tendency is very cold. 

Eating watermelon begins as the summer season starts because the regular consumption of watermelon during the summer season is very beneficial. In these days the heaps of watermelon are engaged in the market. Slightly hard on the top, watermelon contains plenty of water from inside. Oftenly the shopkeeper will show you a red color piece of watermelon and ask you to buy it. You, too, are guessed to be sugary by looking at her red color and will buy a watermelon. Did you know that the watermelon that you buy just as a sweet fruit, in fact, it is a stock of qualities?


In summer, the person itself needs to be hydrated and fresh.  If in this season 1 cup chopped watermelon gets, so what to say. It is not only healthful but it also very much tasty. Watermelon is one of the fruits of high lycopene, especially when you want to lose weight. Besides with plenty of nutrients, a watermelon is a good option for a snack.


Along with beta-carotene, antioxidants are also found in abundance in watermelon. Watermelon contains important mineral elements such as iron, calcium, magnesium, phosphorus and potassium, vitamins A and C which provide you with the ability to fight various types of diseases.  So let's know 14 Amazing Health Benefits of tasty and nourishing fruit, Watermelon of this summer-

हर व्यक्ति की आदतें अलग-अलग होती हैं। ज्योतिष शास्त्र और गरुड़ पुराण में शुभ-अशुभ आदतें बताई गई हैं।


शुभ आदतों की वजह से हमें भाग्य का साथ मिलता है और अशुभ आदतों की वजह से जीवन में परेशानियां बढ़ सकती हैं।



यहां जानिए एक ऐसी बुरी आदत के बारे में जिसकी वजह से चंद्र, राहु-केतु के दोष बढ़ते हैं और गरीबी बढ़ सकती है।



बाथरूम को गंदा छोड़ने की आदत : काफी लोग नहाने के बाद बाथरूम गंदा ही छोड़ देते हैं या बिना वजह पानी की बर्बादी करते हैं। ये आदत ज्योतिष के नजरिए से दुर्भाग्य बढ़ाने वाली है। इसकी वजह से चंद्र और राहु-केतु के दोष बढ़ते हैं।


पानी का कारक चंद्र है और बाथरूम जल तत्व से संबंधित है। बाथरूम में पानी का अपव्यय करने से कुंडली में चंद्र कमजोर हो जाता है।



- जहां गंदगी रहती है, खासतौर पर बाथरूम में गंदगी होने पर राहु-केतु के दोष बढ़ने लगते हैं। राहु-केतु छाया ग्रह हैं और दोनों हमेशा वक्री रहते हैं। ये ग्रह एक राशि में करीब 18 माह रुकते हैं। इनकी वजह से ही कालसर्प योग बनता है। राहु-केतु ऐसे ग्रह हैं, जिनकी वजह से किसी भी व्यक्ति की किस्मत रातोंरात बदल सकती है।


राहु-केतु उन लोगों के लिए अशुभ हो जाते हैं जो साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखते हैं। बाथरूम की गंदगी की वजह से वास्तु के दोष भी बढ़ते हैं।



वास्तु दोष बढ़ने की वजह से घर में नकारात्मकता बढ़ती है। नकारात्मकता की वजह से घर में रहने वाले लोगों के विचार भी नकारात्मक हो जाते हैं।



ऐसे में कामों में सफलता आसानी से नहीं मिल पाती है। चंद्र और राहु-केतु के दोष दूर करने के लिए ध्यान रखें बाथरूम हमेशा साफ रखें और पानी की बर्बादी बिल्कुल भी न करें।

जानिए सत्तू खाने के 8 बेहतरीन फायदे



सत्तू सेहत के लिए वरदान है। गर्मियों में इसका सेवन शीतलता प्रदान करता है। गर्मी में खानपान का खास ख्याल रखना बेहद जरूरी होता है। ग्रीष्मकाल शुरू होते ही भारत में अधिकांश लोग सत्तू का प्रयोग करते हैं, क्योंकि यह ठंडा पेय पदार्थ है। गर्मी के मौसम में ज्यादा प्यास लगने और खुद को शीतल रखने के लिए आप कई तरह की कोल्ड ड्रिंक्स, जूस, शरबत आदि पीते हैं। इन पेय पदार्थो से कुछ देर के लिए तो गला ठंडा हो जाता है, लेकिन थोड़ी देर बाद इसका असर खत्म हो जाता है। इसके अलावा कोल्ड ड्रिंक्स का अधिक सेवन हमारी सेहत पर भी बुरा असर डालता है। ऐसे में सत्तू का सेवन एक अच्छा विकल्प हो सकता है।



यदि हम आपसे पूछें कि क्या आपने सत्‍तू खाया है तो शायद आपको मालूम भी नहीं होगा कि यह होता क्‍या है? क्‍योंकि बर्गर, पिज्‍जा वाले युग में सत्‍तू की कल्‍पना करना भी व्यर्थ  लगता है। लेकिन हम यहाँ आपको यह बताना चाहेंगे कि सत्‍तू एक ऐसा आहार है जो गर्मी में तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है और शरीर को ठंडक पहुंचाता है। वैसे तो सत्तू को इंडियन फास्ट फूड भी कहते हैं क्यूंकि अन्य फास्ट फूड की तुलना में यह आसानी से पच जाता है। साथ ही इसे बनाना भी बहुत आसान होता है। तो इस गर्मी के मौसम में आप इस जल्दी और आसानी से बनने वाले भारतीय आहार का मजा लेकर अपनी सेहत भी संवार सकते हैं।



लेकिन क्‍या आप सत्तू खाने के फायदे जानते हैं? यह एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जो प्राचीन समय से ही हमारे आहार का प्रमुख हिस्‍सा रहा है। साथ ही यह सस्ता, सात्विक व आसानी से मिलने वाला खाद्य पदार्थ है। सत्तू को इतना ज्यादा पसंद किए जाने का कारण केवल इसका स्वाद ही नहीं बल्कि सेहत से जुड़े कई अनमोल फायदे भी हैं। सत्तू में भरपूर मात्रा में आयरन, मैगनीज़, मैग्नीशियम, कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स और सोडियम होता है। यह शरीर को पोषण देने के साथ-साथ मोटापे, मधुमेह और अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद करता है। तो आइए जाने कि क्या हैं सत्तू खाने के 8 बेहतरीन फायदे….

कब है - निर्जला एकादशी, जानिए महत्व और उपवास में ध्यान रखने योग्य बातें

मुख्य बिंदु

इस वर्ष निर्जला एकादशी का व्रत 18 जून को है।

ज्येष्ठ माह में निर्जला एकादशी व्रत किया जाता है।

निर्जला एकादशी व्रत को कठोर व्रत में गिना जाता है।

निर्जला एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु (Lord Vishnu) प्रसन्न होते हैं।



हिन्दू पंचाग के अनुसार प्रत्येक महीने में दो एकादशियां होती हैं, एक कृष्ण पक्ष और दूसरी शुक्ल पक्ष में आती है। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। प्रत्येक एकादशी में भगवान विष्णु के लिये व्रत रखने और उनकी पूजा करने का विधान है। परन्तु सभी एकादशियों में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की  एकादशी का अपना एक महत्वपूर्ण स्थान है।


हिन्दू कैलेंडर में  ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी निर्जला एकादशी कहलाती है। यह एकादशी पांडव एकादशी या भीमसेन एकादशी के नाम से भी जानी जाती है। पौराणिक मान्यता है कि महाभारत के समय पाँच पाण्डवों में एक भीमसेन ने इस कठिन व्रत को निर्जला उपवास किया और स्वर्गलोक को गये इसलिए इसका नाम भीमसेनी एकादशी भी हुआ।


इस एकादशी व्रत में पानी पीना वर्जित माना जाता है इसलिए इस एकादशी को निर्जला कहते है। निर्जला एकादशी पर निर्जल रहकर भगवान विष्णु की आराधना की जाती है। निर्जला एकादशी का व्रत कर लेने से अधिकमास की दो एकादशियों सहित साल की 26 एकादशी व्रत का फल मिलता है और सभी तीर्थों के बराबर पुण्य लाभ होता है। यह व्रत बहुत कठिन होता है क्योंकि बिना अन्न और जल के किया जाता है। लेकिन इस दिन मीठे जल का दान करने का विधान बनाया गया है


इस व्रत के दिन भगवान श्री हरि विष्णु के प्रिय मंत्र ऊँ नमो भगवते वासुदेवायः का जाप भी किया जाता है।


निर्जला एकादशी के दिन व्रत करने से सभी तीर्थों में स्नान के समान पुण्य मिलता है। इस दिन क्षमता के अनुसार मीठे पानी से भरा हुआ मटका, मौसम के अनुसार फल, अन्न, आसन, छतरी, पंखा मंदिर में या किसी ब्राह्मण को या किसी जरूरतमंद को देने से बहुत पुण्य लाभ के साथ-साथ सभी पापों का नाश भी होता है।

कब है - निर्जला एकादशी, जानिए महत्व और उपवास में ध्यान रखने योग्य बातें


निर्जला एकादशी पर सूर्य उदय से पहले उठे।

यह व्रत मन को संयम सिखाता है और शरीर को नई ऊर्जा देता है। यह व्रत पुरुष और महिलाओं दोनों द्वारा किया जा सकता है।

एकादशी के पूजा पाठ में सामग्री शुद्ध और साफ ही प्रयोग में लाएं।


निर्जला एकादशी के व्रत विधान में परिवार में शांतिपूर्वक माहौल बनाए रखें तथा घर में लहसुन प्याज और तामसिक भोजन बिल्कुल भी ना बनाएं।



दोस्तों, निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर श्री हरि विष्णु की कृपा हम सब पर बनी रहे।



जय श्री हरि!!





















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