February 2020

Holi 2020 होलिका दहन का मुहूर्त


होली का पर्व देशभर में बड़े ही धूम- धाम से मनाया जाता है। रंगो के इस पावन त्योहार का हिंदू धर्म में बहुत अधिक महत्व है। आइए, आज जानते हैं, कब मनाई जाएगी होली और किस दिन होगा होलिका दहन.
Holika Dahan Shubh Muhurat 2020



होलिका दहन का शुभ मुहूर्त

- संध्याकाल में- 06 बजकर 22 मिनट से 8 बजकर 49 मिनट तक
- भद्रा पुंछ - सुबह 09 बजकर 50 मिनट से 10 बजकर 51 मिनट तक
- भद्रा मुख : सुबह 10 बजकर 51
मिनट से 12 बजकर 32 मिनट तक


होलिका दहन कथा
शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन की परंपरा भक्त और भगवान के संबंध का अनोखा एहसास है। कथानक के अनुसार भारत में असुरराज हिरण्यकश्यप राज करता था। उनका पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु का अनन्य भक्त था, लेकिन हिरण्यकश्यप विष्णु द्रोही था। 

हिरण्यकश्यप ने पृथ्वी पर घोषणा कर दी थी कि कोई देवताओं की पूजा नहीं करेगा। केवल उसी की पूजा होगी, लेकिन भक्त प्रहलाद ने पिता की आज्ञा पालन नहीं किया और भगवान की भक्ति लीन में रहा। 
हिरण्यकश्यप ने पुत्र प्रहलाद की हत्या कराने की कई बार कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो पाया तो उसने योजना बनाई। इस योजना के तहत उसने बहन होलिका की सहायता ली। होलिका को वरदान मिला था, वह अग्नि से जलेगी नहीं। 

योजना के तहत होलिका प्रहलाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन भगवान ने भक्त प्रहलाद की सहायता की। इस आग में होलिका तो जल गई और भक्त प्रहलाद सही सलामत आग से बाहर आ गए। तब से होलिका दहन की परंपरा है। होलिका में सभी द्वेष भाव और पापों को जलाने का संदेश दिया जाता है।



मनचाहे वरदान के लिए होली के दिन हनुमान जी को पांच लाल पुष्प चढ़ाएं, मनोकामना शीघ्र पूरी होगी

होली की सुबह बेलपत्र पर सफेद चंदन की बिंदी लगाकर अपनी मनोकामना बोलते हुए शिवलिंग पर सच्चे मन से अर्पित करें। किसी मंदिर में शंकर जी को पंचमेवा की खीर चढ़ाएं, मनोकामना पूरी होगी

मनचाही नौकरी पाना हो तो होली की रात बारह बजे से पहले एक दाग रहित बड़ा नींबू लेकर चौराहे पर जाएं और उसकी चार फांक कर चारों कोनों में फेंक दें। फिर वापिस घर जाएं किंतु ध्यान रहे, वापिस लौटते समय पीछे मुड़कर न देखें। यह उपाय श्रद्धापूर्वक करें, शीघ्र ही रोजगार प्राप्त होगा

व्यापार में लाभ के लिए होली के दिन गुलाल के एक खुले पैकेट में एक मोती शंख और चांदी का एक सिक्का रखकर उसे नए लाल कपड़े में लाल मौली से बांधकर तिजोरी में रखें, व्यवसाय में लाभ होगा


होली पर स्किन और हेयर केयर के लिए 8 ट‍िप्स और घरेलू नुस्खे | 8 Hair And Skin Care Tips and Home Remedies 



1. ज़्यादातर सनस्क्रीन में मॉइश्चराइज़र मौजूद होते हैं. अगर आपकी स्किन शुष्क है, तो पहले सनस्क्रीन लगाएं, फिर कुछ समय के बाद मॉइश्चराइज़र का प्रयोग करें.

2. होली खेलने से पहले बालों पर हेयर सीरम या कंडीशनर का उपयोग करें. इससे बालों को गुलाल से पहुंचने वाले सूखेपन से सुरक्षा मिलेगी तथा सूर्य की किरणों से होने वाले नुकसान से भी बचाव होगा.

3. होली खुले में खेली जाती है. ऐसे में सूर्य की गर्मी से भी त्वचा को नुकसान पहुंचता है. सूर्य की किरण में मौजूद यूवी किरणें स्किन को ड्राई कर रंगों को काला करती हैं. ऐसे में आप कुछ घरेलू उपचार कर होली के त्योहार को बिना किसी टेंशन के माना सकते हैं.

4. होली खेलने से करीब 20 मिनट पहले त्वचा पर 20 एसपीएफ सनस्क्रीन लगाएं. 

5. अगर आपकी स्किन एलर्जिक है, तो आप 20 एसपीएफ से ज़्यादा वाली सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें. 

6. आजकल मार्किट में सनस्क्रीन के साथ हेयर क्रीम काफी आसानी से मिल जाती है. थोड़ी-सी हेयर क्रीम लेकर अपनी दोनों हथेलियों पर फैला लें और बालों की हल्की-हल्की मालिश करें. इसके अलावा आप विशुद्ध नारियल तेल की मालिश भी कर सकते है.

7. होली खेलते समय रंग हमारे नाखूनों में भी भर जाते हैं. इससे बचने के लिए नाखूनों पर नेल वार्निश की मालिश करें. 

8. होली खेलने के बाद स्किन और बालों से जमे रंग निकालना काफी मुश्किल का काम होता है. इसके लिए फेस को पहले साफ पानी से धोएं, इसके बाद क्लीजिंग क्रीम या लोशन का लेप लगाएं. कुछ समय के बाद कॉटन को गीला करके उससे साफ करें. क्लींजिंग जेल चेहरे पर जमे रंगों को हटाने में काफी मददगार है.

Innovative Rice Fryum Holi Recipe |बिना मशीन / साँचा 2 चीजों से चावल फ्रायम

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Maha Shivaratri 2020 | महाशिवरात्रि को 29 साल  के बाद महायोग 

भगवान शिव को महाकाल कहा गया है और वहीं देवों के देव महादेव हैं। उन्होंने गंगा को अपने शीष पर धारण किया हुआ है। कहते हैं कि अगर भोले नाथ का पूरे श्रद्धा भाव से पूजा की जाए तो वो हमारी जिंदगी की सभी समस्याओं को समाप्त कर देते हैं। 
Maha Shivaratri 2020 | महाशिवरात्रि को 29 साल  के बाद महायोग

महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त
21 तारीख को शाम को 5 बजकर 20 मिनट से 22 फरवरी, शनिवार को शाम सात बजकर 2 मिनट तक रहेगा।

वैष्णव संप्रदाय उदियात अर्थात् जो सूर्योदय के समय तिथि हो उसे मानते हैं। इसलिए इस साल महाशिवरात्रि 21 फरवरी को मनाई जाएगी।
शैव संप्रदाय के अनुसार निशीथ में चतुर्दशी तिथि व्याप्त होने पर 21 फरवरी को शिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। वहीं 22 फरवरी को वैष्णवों द्वारा उदियात (सूर्योदय के समय) में चतुर्दशी तिथि के चलते व्रत परायण करना श्रेयस्कर है। शिव खप्पर पूजन 23 फरवरी अमावस्या को होगा। उक्त जानकारी पं. अमित भारद्वाज ने दी है। शिवरात्रि पर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भगवान का रुद्राभिषेक किया जाता है। शिवरात्रि के दिन सुबह नहा धोकर मंदिर जाकर ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप करना चाहिए। 

इस बार महाशिवरात्रि को 29 साल बाद महायोग की त्रिवेणी होगी। शशि, सुस्थिर और सर्वार्थ सिद्धि योग में शिवरात्रि महापर्व मनाया जाएगा। ज्योतिषियों के अनुसार महाशिवरात्रि को 29 साल बाद शशि योग बनेगा। इसकी वजह यह है कि शनि 29 साल बाद अपनी राशि मकर में और गुरु भी अपनी राशि धनु में स्थित है। यह योग चन्द्र से शनि के प्रथम, चतुर्थ, सप्तम या दसवे स्थान पर होने पर यह योग बनता है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि व सुस्थिर योग भी रहेगा। श्रवण नक्षत्र और चतुर्दशी के एक साथ होने से यह योग बनते है। ये दोनों योग भी शुभ माने गए हैं। महाशिवरात्रि को शहर के विभिन्न शिवालयों में दिन भर अभिषेक व कीर्तन का क्रम रहेगा।

राशि अनुसार उपाय
महाशिवरात्रि को मेष, वृषभ व मिथुन राशि वालों को रुद्रष्टध्यायी, कर्क, सिंह व कन्या राशि वालों को शिव तांडव स्त्रोत, तुला, वृश्चिक व धनु राशि वालों को शिव महिम्न स्रोत, मकर राशि वालों को शिव चन्द्रशेखर स्त्रोत, कुंभ राशि वालों को शिव पंचाक्षर व मीन राशि वालों को महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से लाभ होगा।

जोधपुर के ज्योतिषियों के अनुसार 21 फ रवरी की शाम 5.22 बजे तक त्रयोदशी तिथि शुरू हो जाएगी। इस बार 117 साल बाद शिवरात्रि को शनि और शुक्र का दुर्लभ योग बन रहा है। शनि अपनी स्वयं की राशि मकर में और शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में रहेगा। इससे पहले ऐसा योग 25 फ रवरी 1903 को बना था। गुरु भी अपनी स्वराशि धनु में स्थित है। इस योग में शिव पूजा करने पर शनि, गुरु व शुक्र के दोषों से मुक्ति मिल सकती है।
नए कार्यो की शुरूआत करने के लिए ये योग बहुत ही शुभ माना गया है। शिवरात्रि पर शनि के साथ चंद्र भी रहेगा। शनि-चंद्र की युति की वजह से विष योग बन रहा है। इस योग में शनि और चंद्र के लिए विशेष पूजा करनी चाहिए।