शिवयोग में मनेगा महाशिवरात्रि का पावन पर्व, पूजा करते समय भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां

Mahashivratri 2021: शिवयोग में मनायें महाशिवरात्रि का पावन पर्व, भूलकर भी न करें 7 गलतियां



हिन्दू धर्म में महाशिवरात्रि को भगवान शिव के प्रति सच्‍ची आस्‍था और श्रृद्धा का पर्व माना जाता है। शिव जी को वरदान देने वाले देवता कहा जाता है, भगवान शिव अपने नाम भोलेनाथ के अनुसार बहुत ही भोले माने जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान भोलेनाथ का व्रत रखने से वो अत्यंत प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों की सभी समस्याओं का समाधान करते हैं।

इस वर्ष 2021 में, यह महापर्व 11 मार्च को मनाया जायेगा। इस दिन सुबह 09 बजकर 22 मिनट तक महान कल्याणकारी 'शिवयोग' भी विद्यमान रहेगा। शिव योग को स्वयं भगवान शिव से आशीर्वाद प्राप्त है। यह त्यौहार भगवान शिव और पार्वती माता के विवाहोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

पूजा शुभ मुहूर्त: 

 


 

महा शिवरात्रि 11 मार्च दिन बृहस्पतिवार को है। महाशिवरात्रि पूजा का सबसे शुभ समय 12:06 AM से 12:55 AM, मार्च 12 तक है। महाशिवरात्रि पूजा के अन्य शुभ मुहूर्त- रात्रि प्रथम प्रहर पूजा 06:27 PM से 09:29 PM, रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा 09:29 PM से 12:31 AM (मार्च 12), रात्रि तृतीय प्रहर पूजा 12 मार्च 12:31 AM से 03:32 AM, रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा 03:32 AM से 06:34 AM तक। चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ 11 मार्च को 02:39 PM बजे से होगा और समाप्ति 12 मार्च को 03:02 PM बजे। 12 मार्च को शिवरात्रि व्रत पारण समय 06:34 AM से 03:02 PM तक।


शिव पूजा के दौरान भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां

 


1. शंख का प्रयोग न करें

भगवान शिव की पूजा में कभी भी शंख से जल अर्पित नहीं किया जाता है और न ही भगवान शिव की पूजा में शंख का उपयोग किया जाता है। दैत्य शंखचूड़ का भगवान शंकर ने त्रिशूल से वध किया था जिसके बाद उसका शरीर भस्म हो गया और उसी भस्म से ही शंख की उत्पत्ति हुई थी। मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान शिव रुष्‍ट हो सकते हैं। इसलिए भोलेबाबा की पूजा में शंख नहीं बजाना चाहिए।

2. तुलसी पत्ता

शिव जी के पंचामृत में भूलकर भी तुलसी का प्रयोग नहीं किया जाता। ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव ने जलंधर नामक राक्षस का वध किया था और जलंधर की पत्‍नी वृंदा बाद में तुलसी का पौधा बन गई थीं जिसे भगवान विष्णु ने पत्नी रूप में स्वीकार किया था। इसलिए शिव जी की पूजा में तुलसी का प्रयोग करना मना है।

3. पुष्प

भगवान शिव की पूजा में केसर, दुपहरिका, मालती, चम्पा, चमेली, कुन्द, जूही आदि के पुष्प नहीं चढ़ाने चाहिए। क्योंकि ये फूल शिव जी को प्रिय नहीं होते हैं।

4. काला तिल

यह माना जाता कि काला तिल भगवान विष्णु के मैल से उत्पन्न हुआ है इसलिए इसे भगवान शिव को अर्पित नहीं करना चाहिए।

5. टूटे हुए चावल

शास्त्रों में भगवान शिव को अक्षत यानी साबुत चावल अर्पित किए जाने के बारे में लिखा है। टूटा हुआ चावल अपूर्ण और अशुद्ध होता है इसलिए यह शिव जी को नहीं चढ़ाया जाता है।

6. सिंदूर या कुमकुम

कुमकुम सौभाग्य का प्रतीक है जो हिंदू महिलाएं अपने पति की लम्बी उम्र के लिए लगाती हैं। जबकि भगवान शिव वैरागी हैं और विध्वंसक के रूप में जाने जाते हैं इसलिए शिवलिंग को कुमकुम नहीं चढ़ता।

7. टूटे बेलपत्र न करें अर्पित

भगवान शिव को कभी भी टूटे हुए बेल पत्र या फिर दो मुंह वाले बेलपत्र नहीं चढ़ाने चाहिये।  




 









Tags: 2021 ka mahashivratri puja kab hai, adiyogi mahashivratri 2021, art of living mahashivratri 2021, शिवयोग में मनाये महाशिवरात्रि का पावन पर्व भूलकर भी न करें 7 गलतियां, महाशिवरात्रि 2021 शुभ मुहूर्त, महाशिवरात्रि 2021 में कब है, what is the date of mahashivratri in 2021, shivratri mahashivratri 2021, mahashivratri vrat vidhi, mahashivratri utsav, mahashivratri vrat katha, mahashivratri reason to celebrate, mahashivratri mahatva, mahashivratri kitne tarikh ko hai, mahashivratri in hindi, mahashivratri greetings images, mahashivratri festival, mahashivratri fasting, mahashivratri fast vidhi, mahashivratri celebrated why, mahashivratri 2021 dont do these things on mahashivratri festival, mahashivratri 2021 don't do these things on mahashivratri









____ 
 99advice.com provides you with all the articles pertaining to Travel, Astrology, Recipes, Mythology, and many more things. We would like to give you an opportunity to post your content on our website. If you want, contact us for the article posting or guest writing, please approach on our "Contact Us page."
Share To:

Sumegha Bhatnagar

Post A Comment:

0 comments so far,add yours